After the SSC examinations, the choice of youth is the job of the banks. With today's youth SSC, the bank prepares for the examination of PO and bank clerks. Nowadays the case of consolidated banks is booming in the country very fast. The Central Government wants to run only seven banks like SBI in the country. Regional and small banks are being merged with all these seven banks. It was recently heard that nine banks are being merged with other major banks. The names of these banks are Central Bank of India, IDBI, Dena Bank, UCO Bank, Bank of Maharashtra etc. - The merger of these banks does not make any difference to the health of the common customers, but the future of youth seeking jobs in these banks is definitely going to make a difference. The board which offers jobs in private and small banks will be weak and there will be problems in getting jobs because of decreasing its power. Job numbers will also be affected. It means that now only those young people will be able to get jobs in banks, who will be able to prepare for the SBI label.
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Saturday, 29 July 2017
जॉब न्यूज: बैंक अभ्यथियों के सामने नई टेंशन
एसएससी की परीक्षाओं के बाद युवाओं की पसंद बैंकों की जॉब होती है। आज का युवा एसएससी के साथ बैंक पीओ और बैँक क्लर्क की परीक्षा की तैयारी करता है। देश में आजकल बैंकों के कॉन्सालिडेटेड का मामला बहुत तेजी से उछल रहा है। केन्द्र सरकार देश में एसबीाआई जैसी केवल सात बैंकें ही चलाना चाहती है। क्षेत्रीय और छोटी बैंकों को इन सभी सातों बैंकों में मर्ज किया जा रहा है। अभी हाल ही में सुनने में आया था कि नौ बैंकों का अन्य बड़ी बैंकों में मर्ज किया जा रहा है। इन बैंकों के नाम हैं सेन्ट्रल बैँक आफ इंडिया, आईडीबीआई, देना बैंक, यूको बैंक, बैँक आफ महाराष्ट्र आदि-आदि। इन बैँकों के मर्जर से आम ग्राहकों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला लेकिन इन बैँकों में नौकरी चाहने वाले युवाओं के भविष्य पर अवश्य ही फर्क पडऩे वाला है। निजी और छोटी बैँकों में नौकरी दिलाने वाला बोर्ड कमजोर होगा और उसकी शक्तियां घटने से जॉब मिलने में भी परेशानी होगी। जॉब संख्या भी प्रभावित होगी। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब केवल उन्हीं युवाओं को बैंकों की नौकरी मिल सकेगी जो एसबीाआई लेबल की तैयारी कर पाएंगे।
Friday, 28 July 2017
नीट का कोटा लागू करने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों पर कसेगा शिकंजा
नीट के तहत एमबीबीएस में छात्रों को 15 प्रतिशत का कोटा निजी मेडिकल कालेजों में दिलाने के लिए एमसीआई ने सरकार के साथ मिलकर कमर कस ली है। इस उद्देश्य से नीट लागू करने के लिए आईएमसी संशोधन अधिनियम ,2016 के साथ भारतीय चिकित्सा परिषद(एमसीआई) ने केंद्र सरकार की पूर्वानुमति से स्नातक मेडिकल शिक्षा नियमन,1997 तथा स्नातकोत्तर मेडिकल शिक्षा नियमन, 2000 में संशोधन किया है ताकि कॉमन काउंस्लिंग का प्रवाधान किया जा सके। मेडिकल पाठ्यक्रमों में नीट तथा कॉमन काउंस्लिंग के माध्यम से प्रवेश मिलेगा । काउंस्लिंग के बाद प्रवेश नामांकन के ब्यौरे एमसीआई को भेजे जाते हैं।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मामले में संबंधित राज्य सरकार फीस निर्धारित करने के लिए उत्तरदायी है और निजी मेडिकल कॉलेजों के मामले में फीस का ढांचा उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार दवारा सेवा निवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में बनाई गई समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह निर्णय समिति को लेना है कि क्या संस्थान द्वारा प्रस्तावित फीस न्यायोचित है और क्या समिति द्वारा निर्धारित फीस ढांचा संस्थान के लिए बाध्यकारी है।
उच्चम न्यायालय ने 09.05.2017 को अपने आदेश में निर्देश दिया था कि कॉमन काउंस्लिंग के अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी संस्थानों/कॉलेजों/विश्विद्यालयों को देय फीस के लिए काउंस्लिंग समिति को डिमान्ड ड्राफ्ट जमा कराएंगे। काउंस्लिंग के बाद प्रवेश नामांक के ब्यौरे एमसीआई को भेजे जाते हैं। एमसीआई ब्यौरों की जांच करती है और किसी मेडिकल कॉलेज में नियमों का उल्लंघन करके प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को डिस्चार्ज नोटिस जारी करती है। विद्यार्थियों को अवगत कराने के लिए एमसीआई ने अपनी वेबसाइट पर मेडिकल कॉलेजों में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की स्वीकृति की जानकारी दी है। एमसीआई की वेबसाइट पर विद्यार्थियों के लिए एडवाइजरी भी दी गई है। यह जानकारी आज लोक सभा में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने एक लिखित उत्तर में दी।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मामले में संबंधित राज्य सरकार फीस निर्धारित करने के लिए उत्तरदायी है और निजी मेडिकल कॉलेजों के मामले में फीस का ढांचा उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार दवारा सेवा निवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में बनाई गई समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह निर्णय समिति को लेना है कि क्या संस्थान द्वारा प्रस्तावित फीस न्यायोचित है और क्या समिति द्वारा निर्धारित फीस ढांचा संस्थान के लिए बाध्यकारी है।
उच्चम न्यायालय ने 09.05.2017 को अपने आदेश में निर्देश दिया था कि कॉमन काउंस्लिंग के अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी संस्थानों/कॉलेजों/विश्विद्यालयों को देय फीस के लिए काउंस्लिंग समिति को डिमान्ड ड्राफ्ट जमा कराएंगे। काउंस्लिंग के बाद प्रवेश नामांक के ब्यौरे एमसीआई को भेजे जाते हैं। एमसीआई ब्यौरों की जांच करती है और किसी मेडिकल कॉलेज में नियमों का उल्लंघन करके प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को डिस्चार्ज नोटिस जारी करती है। विद्यार्थियों को अवगत कराने के लिए एमसीआई ने अपनी वेबसाइट पर मेडिकल कॉलेजों में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की स्वीकृति की जानकारी दी है। एमसीआई की वेबसाइट पर विद्यार्थियों के लिए एडवाइजरी भी दी गई है। यह जानकारी आज लोक सभा में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने एक लिखित उत्तर में दी।
Thursday, 13 July 2017
SSC-CGL: What to do in the last moments?
Give a practice test every day and try your strengths.
Dates of SSC CGL exams are coming near The candidates whose preparations have been completed and have been completed, they are very proud, whether for them in August or tomorrow is all the same. The partners who have gone a little too far, their course has been prepared and are in the Revision, it is also good for them, they are also in a position to do a lot. Now those who are close to completing the course. It would be best for all of them to try their strengths and their minds and their own destiny every day in a Test series. This will check their memory, practice and their mental preparation will be very good. This is important work, which can be done in the last moments.SSC-CGL: Do not fall in the cutoff
Try to Best of Your Best
What will be the cut-off this year for the pre-SSC-CGL exam and how much will it come? The accounting of these things must have been going on in the minds of the candidates. This calculation can have an effect on preparation in your mental preparation and trust. If good readiness does not fall in this round then it will be better. This is only done by people who do not believe in themselves. Increase your self-confidence in the last moments and keep away from the hassles and expectations of your cutoffs. At this moment, put your moment in preparation and practicing and practicing only. This will increase your morale. Neither practice nor dizziness by the numbers that come in the mock test, but see the acuity of the answers to your questions. Minimize the mistake. The questions are greater. Do not make mistakes in the attempt of more questions. Though the questions may be less but there are no mistakes. In one sentence, if you are told, best from your best and forget how much the cutoff will come.एसएससी-सीजीएल:कटआफ के फेर में न पड़ें
एसएससी-सीजीएल की परीक्षा के प्री के लिए इस वर्ष कटआफ क्या रहेगा और कितना आएगा? इन बातों का हिसाब-किताब अवश्य ही अभ्यर्थियों के दिमाग में चल रहा होगा। इस हिसाब-किताब से आपकी मानसिक तैयारी एवं विश्वास में तैयारी पर असर पड़ सकता है। अच्छी तैयारी करने वाले इस फेर में न पड़ें तो बेहतर ही होगा। यह केवल वही लोग करते हैं जिन्हें अपने पर विश्वास नहीं होता। अंतिम क्षणों मे अपना आत्म विश्वास बढ़ाएं और अपने कटआफ की झंझटों और उम्मीदों से दूर रखें। इस समय आपको अपने एक-एक क्षण को तैयारी में लगाएं और अभ्यास और सिर्फ अभ्यास करें। इससे आपका मनोबल बढ़ेगा। अभ्यास यानी मॉक टेस्ट में आने वाले नम्बरों से न तो इतराएं और न ही चकराएं बल्कि अपने प्रश्नों के जवाबों की एक्युरेसी देखें। गलती कम से कम हों। सवाल अधिक से अधिक हों। अधिक सवाल के प्रयास में गलतियां न करें। सवाल भले ही कम हों ेलेकिन गलतियां न हों। एक वाक्य में कहा जाए तो आपको अपना बेस्ट से बेस्ट करें और भूल जाएं कि कटआफ कितना आएगा।
एसएससी-सीजीएल:आखिरी क्षणों में क्या करें?
एसएससी सीजीएल की परीक्षा की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं। जिन अभ्यर्थियों की तैयारी पूरी हो चुकी है और रिवीजन भी हो चुका है, उनके हौंसले बुलंद हैं, उनके लिए चाहे अगस्त में परीक्षा हो या कल सब बराबर है। जो साथी थोड़े बहुत पिछड़ गए हैं, उनका कोर्स तैयार हो चुका है और रिवीजन में जुटे हुए हैं, उनके लिए भी अच्छी बात है वह भी काफी कुछ करने की स्थिति में हैं। अब जो लोग कोर्स पूरे करने के करीब हैं । इन सभी के लिए सबसे अच्छा यह होगा कि किसी टेस्ट सीरीज में रोजाना अपनी ताकत और अपना दिमाग और अपना भाग्य आजमाएं। इससे उनकी याददाश्त चेक होगी, अभ्यास होगा और उनकी मानसिक तैयारी काफी अच्छी हो जाएगी। यही महत्वपूर्ण कार्य है, जो अंतिम क्षणों में किया जा सकता है।
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