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Tuesday, 7 March 2017

पहला अध्याय: कौन लोग करते हैं एसएससी की तैयारी

बात कहां से शुरू की जाए कि जम जाए
शुरुआत बात की वहां से की जाए
कि लोगों की  सांसें थम जाएं और
आपकी महफिल पूरी तरह से जम जाए
हर भारतीय का सपना होता है कि उसकी संतान डॉक्टर या इंजीनियर हो, इसके बाद उसे अपनी संतान को आईएएस आफिसर बनाना पसंद होता है। यदि ये सब न बन पाएं तो फिर उसका बेटा या बेटी ऑफिसर अवश्य बने।
ये सब बातें तो ठीक हैं। मैं भी यही चाहता हूं कि हर भारतीय तरक्की करे। डॉक्टर, इंजीनियर आईएएस ऑफिसर बने और न हो तो कम से कम एक अधिकारी तो बने ही।
लेकिन डॉक्टर, इंजीनियर,आईएएस अथवा अधिकारी बनना आसान नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं है। क्योंकि कहा गया है-
करत-करत अभ्यास से जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात ते पाथर परत निशान।।
यदि आपमें लगन हो और पक्का इरादा हो तो कोई भी प्रतियोगी परीक्षा को पास करना मुश्किल नहीे है। अब विचार करना है कि कौन सी परीक्षा कब देनी चाहिए। इन सभी वर्गों में डॉक्टर और इंजीनियर की शाखाएं तो अलग हैं। यूपीएससी और एसएससी करना एक ही श्रेणी की दो सीढिय़ों वाली परीक्षाएं हैं। जिन विद्यार्थियों की गणित विषय में अधिक रुचि हों और अच्छे अंक आते हों तो उनके लिए इंजीनियरिंग शाखा अति उत्तम होती है। जिन विद्यार्थियों के बायोलॉजी में अच्छे अंक आते हैं तो वे डॉक्टरी की राह चुन सकते हैं। इसके बाद कॉमर्स क्षेत्र में अच्छे अंक वाले विद्यार्थी सीए, सीएस और बीबीए और एमबीए की राह को अपना सकते हैं। इसके अलावा आर्ट के तमाम विषयों के विद्यार्थी भी अपना-अपना व्यवसाय चुन सकते हैं। एसएसएसी और यूपीएसएस के लिए सभी विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी अपनी लगन-मेहनत और पक्के इरादे के साथ कामयाबी पा सकते हैं।
विषयवार पारंगत होने के बाद भी आप अपने क्षेत्र में जाने के लिए यदि नवीं एवं दसवीं कक्षा से योजनाएं बना लें तो सर्वोत्तम होगा और उसके अनुसार आपको सीढ़ी-दर-सीढ़ी सफलता मिलती जाएगी।
एमबीबीएस के लिए विद्यार्थी को कक्षा नौ परीक्षा के साथ ही तैयारी करनी होगी और उसे अपने मनपसंद विषय बायोलॉजी में अधिक से अधिक अंक लाने होंगे और कक्षा दस के बाद से उसे दो साल का फाउंडेशन कोर्स करना चाहिए। इसके साथ इंटर की परीक्षा देने के साथ ही क्रैश कोर्स कर लेना चाहिए। उसके बाद ही एमबीबीएस की एंंटे्रेंस परीक्षा देनी चाहिए। इसके बाद आपकी किस्मत ने साथ दिया तो आप इंटर करने के साथ ही बाजी मार सकते हैं यदि बाजी नहीं मार पाए तो निराश न होइए और कम से कम तीन साल तक प्रयास करने पर सफलता निश्चित रूप से मिल जाती है। यह सब आपकी मेहनत,लगन और पक्के इरादे पर निर्भर होता है।
इसी तरह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के लिए दसवीं से गणित विषय पर जोर देना चाहिए। इसके लिए आपको कम से कम 70 से 75 प्रतिशत अंक लाने ही होंगे यदि 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक लाते हैं तो सोने पर सुहागा होगा। यही स्तर 12 वीं की परीक्षा में बना रहना चाहिए। दसवीं के बाद इंजीनियरिंग का भी फाउंडेशन कोर्स करके आगे बढ़ा जा सकता है।
अब आइए यूपीएससी,एसएससी व एमबीए अन्य शाखाओं की ओर जाने वाले विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने मनपसंद आर्ट के विषयों को लें और उनमें जितने अधिक से अधिक अंक लाकर परीक्षा की तैयारी करें। तभी कुछ संभव होगा। 

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