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Tuesday, 7 March 2017

दूसरा अध्याय: एसएससी ही क्यों जरूरी है?

पहले अध्याय में हमने डॉक्टर,इंजीनियर,आईएएस,यूपीएससी,एसएससी,एमबीए,सीए व सीएस आदि प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके विद्यार्थियों के बारे में विस्तृत चर्चा की। हमारा रुझान केवल एसएससी के परीक्षार्थियों ओर ही है इसलिए अब हम सिर्फ एसएससी की परीक्षा की तैयारियों एवं उनके विद्यार्थियों के बारे में चर्चा की जाएगी।
सबसे पहले प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का लक्ष्य तय करना चाहिए। उसके बाद ही उसकी तैयारी की रणनीति में जुटना चाहिए।
.....क्योंकि कोई भी तस्वीर सीधे ही नहीं खूबसूरत बन जाती। तस्वीर के बारे में पहले कल्पना की जाती है अथवा पहले से ही उसकी कल्पना की गई होती है। उसके बाद उसकी आउट लाइन यानी रेखाएं खींचनी पड़ती है। उसके बाद रेखाओं को आपस में मिला कर तस्वीर को एक आकार देना होता है। उसके बाद उसकी फिनिशिंग करनी होती है। इसके बाद उसमें भरे जाने वाले रंगों का चयन किया जाता है। रंगों के चयन के बाद ही उसे रंगा जाता है। इतनी सारी प्रक्रिया में जरा सी कहीं चूक हो गई तो तस्वीर खूबसूरत न होकर बदसूरत हो जाती है। इसलिए हर स्टेप पर खूब सोच समझ कर पूरा दिमाग लगा कर तस्वीर बनानी होती है तभी ये तस्वीर खूबसूरत होती है। खूबसूरत चीज की दुनिया में हमेशा कद्र होती है। इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए।
यदि हमनें शुरू से सोचा है कि एसएससी ही करेंगे तो फिर उसी तरीके से रणनीति भी बनाएंगे और रणनीति सही बनी है तो परिणाम भी अवश्य ही सकारात्मक ही आएगा।
यदि हमे कई रास्तों में भटकने के बाद एसएससी का रास्ता अपनाना पड़ रहा है  तो सोचने की बात अवश्य है। इसमें आपको शुरू से सोचकर तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से दोगुना अधिक परिश्रम करना होगा क्योंकि यह मत भूलना कि यह प्रतियोगी परीक्षा है न कि विद्यालय या बोर्ड या यूनिवर्सिटी की परीक्षा नहीं है कि पासिंग मार्क ही लाना है। यहां तो आपका एक नंबर भी आपको लाखों परीक्षार्थियों में आगे-पीछे कर सकता है।  इसलिए पहले यह सोचें कि एसएससी आपके लिए जरूरी क्यों है?

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